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बस ये है मेरी ज़िंदगी

बस ये है मेरी ज़िंदगी
उत्साह नया था और फिर कलम चली थी,
जज़्बात का पहला खत कुछ यूँ लिखा था मैंने..
और फिर जब खुद से जी लिए तो खुद्दार हो गए,
जिसको इज़्ज़त समझकर गुरुर करते रहे,
कुछ दिनों में वो हमारे अहंकार हो गए,
जो कुछ अच्छी बातें जान लिए तो हम जानकार हो गए,
और जो उन बातों को अपना लिया तो हम बेकार हो गए,
बस ये है मेरी ज़िंदगी.......
जो अपनों से सच्चाई बताई तो दिमागी हो गए,
जो थोड़ी सहूलियत की बात की तो हम भी नवाबी हो गए,
जो खुशियों को देखा तो चुलबुले हो गए,
जो उसकी ओर बढ़े तो हम बुलबुले हो गए,
पर जिस तरह बुलबुले को फूटना होता है,
हर कांच को एक न एक दिन टूटना होता है,
उसी तरह ज़िन्दगी ने सच का सामना करना सीखा दिया,
अपने जज़्बातों को खुद से थामना बता दिया,
बस ये है मेरी ज़िंदगी.....
जो चाहा उसे पाना चाहा तो हम जूनूनी हो गए,
जो ज़िन्दगी से लड़ना चाहा तो हम भी खूनी हो गए,
जो हमारी झोपड़ी में खुशियां आई तो वो आशियाने हो गए,
जब हमारी बातें लोगों को सच लगी तो वो अफ़साने हो गए,
और जो उनको सच न लगी वो बहाने हो गए,
बस ये है मेरी ज़िन्दगी......!!!!

क्यों खो जाना चाहते हो..

क्यों खो जाना चाहते हो.....
नही आज सच बता ही दो कि इस दुनिया की भीड़ में ही तुम क्यों खो जाना चाहते हो,
वादे,इरादे,रिश्ते,नाते बस इन्हीं के होकर क्यों रह जाना चाहते हो,
नही सच में आज बता ही दो क्यों खो जाना चाहते हो....
हँसी, खुशी, उत्सव, उपहार के जीवन का एक हिस्सा है,
ईर्ष्या, द्वेष, क्लेश,पाप इनका भी जीवन में किस्सा है,
फिर क्यों सिर्फ कुछ लम्हों में सिमट कर रह जाना चाहते हो,
नही सच में आज बता ही दो क्यों खो जाना चाहते हो....
वो हर सुबह की पहली किरण जब चेहरे पर पड़ती है,
पलकें अंगड़ाइयां लेकर कई नए सपनों के साथ उठती है,
क्यों उन सपनों को यूंही जाया हो जाने देना चाहते हो,
नही सच में आज बता ही दो क्यों खो जाना चाहते हो....
उस साज-ए-शहर में कुछ सोचकर प्यारी सी मुस्कान जब लबों पर आती है,
पता है मुझे उस पल वो विश्वास की कली खुशी से झूम कर खिल जाती है,
क्यों उस कली को मुरझा जाने देना चाहते हो,
नही सच में आज बता ही दो क्यों खो जाना चाहते हो...
चलो मान लिया हाँ चलो मान लिया कि-
इस मन सारी ख्वाहिशें नही पूरी होती हैं,
शायद कभी हारने से पहले जीत से कुछ ही दूरी होती है,
पर क्यों उन हार में खुद क…

एक दूसरे का सम्मान करो....!!!

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आराधना का बस यही है कहना एक दूसरे का सम्मान करो....!!!




भारत माँ की नंदिनी हूँ उनके लिए कुछ खास लिख दूँ,बड़ा ही सुंदर बड़ा ही दिव्य इस धरा का राज लिख दूँ,आज़ादी के इस पावन अवसर पर कुछ अनुपम अल्फ़ाज़ लिख दूँ,कुछ कृत्य,कुछ सत्यता आज मैं साफ साफ लिख दूँ..…...
महापुरूषों के अनमोल वचनों पर आप भी कुछ विचार करो, आराधना का तो बस यही है कहना इनको जीवन में स्वीकार करो, अच्छाई करोगे तो खुदगर्ज़ कहेंगे ये ज़ालिम दुनिया वाले, पर फिर भी मैं बस यही कहूँगी अच्छाई का ही तुम मार्ग चुनो!!! सूर्य से सीखो इस पृथ्वी के लेन-देन का लेखा-जोखा, किसी को कुछ लौटाने के लिए ढूढ़ना पड़ता है मौका, तुम तो इसके साधन मात्र हो,तुम तो इसका ध्यान धरो, ए-भारत माँ के वीर सपूतों माँ के लिए कुछ काम करो!!!!! आदर्श,अनुशासन और मर्यादा को जीवन में उचित स्थान तो दो, पर जीत तुम्हें हासिल करनी है तो दूसरों के लिए भी काम करो, नियम, रीति और समाजिकता का उतना ही तुम आविष्कार करो, नींव न अपनी हिलने पाए ऐसा कुछ आधार बुनो, दिलचस्प बना दो हर अवसर को सबके दिलों में स्थान रखो, याद रखे ये दुनिया वाले ऐसे कुछ तुम काम करो!!! होंगी आलोचनाएं, उठेंगी उंगलिया…

Himanshu sachan

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अजब इश्क़ है


अजब इश्क़ है, ये गज़ब इश्क़ है, मुझे न पता, ये क्या इश्क़ है, सफर में मिले अजनबी साथ है, और तुम कह रहे हो, यही इश्क़ है, अजब इश्क़ है, ये गज़ब इश्क़ है, मुझे न पता, ये क्या इश्क़ है,
जो पहले कभी भी, मिले भी न थे, वो एक तुझे से मिलके, अब साथ है, यही इश्क़ है, हाँ यही इश्क़ है, अजब इश्क़ है, ये गज़ब इश्क़ है, मुझे न पता, ये क्या इश्क़ है,
जिनका कभी कोई, वादा न था, मिलने का कोई,  इरादा न था, वो दो जिस्म, और एक जान है, यही इश्क़ है, हाँ यही इश्क़ है, अजब इश्क़ है, ये गज़ब इश्क़ है, मुझे न पता, ये क्या इश्क़ है,
अगर आज महफ़िल, कोई मिले, जिस देखकर तेरा, दिल ये कहे, कि यही तेरी दुनिया है,  मंजिल यही, समझ जाना कि, हाँ यही इश्क़ है, अजब इश्क़ है, ये गज़ब इश्क़ है, मुझे न पता, ये क्या इश्क़ है,
बिना सोचे समझे चले जाना तुम, हालात दिल के, सुना आना तुम, शायद उसे भी,