एक दूसरे का सम्मान करो....!!!

आराधना का बस यही है कहना एक दूसरे का सम्मान करो....!!!

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भारत माँ की नंदिनी हूँ उनके लिए कुछ खास लिख दूँ,बड़ा ही सुंदर बड़ा ही दिव्य इस धरा का राज लिख दूँ,आज़ादी के इस पावन अवसर पर कुछ अनुपम अल्फ़ाज़ लिख दूँ,कुछ कृत्य,कुछ सत्यता आज मैं साफ साफ लिख दूँ..…...

महापुरूषों के अनमोल वचनों पर आप भी कुछ विचार करो,
आराधना का तो बस यही है कहना इनको जीवन में स्वीकार करो,
अच्छाई करोगे तो खुदगर्ज़ कहेंगे ये ज़ालिम दुनिया वाले,
पर फिर भी मैं बस यही कहूँगी अच्छाई का ही तुम मार्ग चुनो!!!
सूर्य से सीखो इस पृथ्वी के लेन-देन का लेखा-जोखा,
किसी को कुछ लौटाने के लिए ढूढ़ना पड़ता है मौका,
तुम तो इसके साधन मात्र हो,तुम तो इसका ध्यान धरो,
ए-भारत माँ के वीर सपूतों माँ के लिए कुछ काम करो!!!!!
आदर्श,अनुशासन और मर्यादा को जीवन में उचित स्थान तो दो,
पर जीत तुम्हें हासिल करनी है तो दूसरों के लिए भी काम करो,
नियम, रीति और समाजिकता का उतना ही तुम आविष्कार करो,
नींव न अपनी हिलने पाए ऐसा कुछ आधार बुनो,
दिलचस्प बना दो हर अवसर को सबके दिलों में स्थान रखो,
याद रखे ये दुनिया वाले ऐसे कुछ तुम काम करो!!!
होंगी आलोचनाएं, उठेंगी उंगलियां पर फिर भी तुम ईमानदार बनो,
शत्रुओं का विनाश करके हर पल में एक इतिहास रचो,
जीवन में हर किसी को उसका उचित स्थान ही दो,
आराधना का बस यही है कहना एक दूसरे का सम्मान करो....!!!
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