बस ये है मेरी ज़िंदगी

बस ये है मेरी ज़िंदगी
उत्साह नया था और फिर कलम चली थी,
जज़्बात का पहला खत कुछ यूँ लिखा था मैंने..
और फिर जब खुद से जी लिए तो खुद्दार हो गए,
जिसको इज़्ज़त समझकर गुरुर करते रहे,
कुछ दिनों में वो हमारे अहंकार हो गए,
जो कुछ अच्छी बातें जान लिए तो हम जानकार हो गए,
और जो उन बातों को अपना लिया तो हम बेकार हो गए,
बस ये है मेरी ज़िंदगी.......
जो अपनों से सच्चाई बताई तो दिमागी हो गए,
जो थोड़ी सहूलियत की बात की तो हम भी नवाबी हो गए,
जो खुशियों को देखा तो चुलबुले हो गए,
जो उसकी ओर बढ़े तो हम बुलबुले हो गए,
पर जिस तरह बुलबुले को फूटना होता है,
हर कांच को एक न एक दिन टूटना होता है,
उसी तरह ज़िन्दगी ने सच का सामना करना सीखा दिया,
अपने जज़्बातों को खुद से थामना बता दिया,
बस ये है मेरी ज़िंदगी.....
जो चाहा उसे पाना चाहा तो हम जूनूनी हो गए,
जो ज़िन्दगी से लड़ना चाहा तो हम भी खूनी हो गए,
जो हमारी झोपड़ी में खुशियां आई तो वो आशियाने हो गए,
जब हमारी बातें लोगों को सच लगी तो वो अफ़साने हो गए,
और जो उनको सच न लगी वो बहाने हो गए,
बस ये है मेरी ज़िन्दगी......!!!!
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