Love Poetry



 शायद वो जानती है


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एक मोहब्बत है काश वाली,
पहले इश्क़ के एहसास वाली,
राधा जैसी त्याग वाली,
मीरा जैसी अमृत्व प्रेम वाली,
हाँ एक मोहब्बत है काश वाली,

इस मोहब्बत में एक लड़का है, थोड़ा पागल, थोड़ा दीवाना,
खुद से भी ज्यादा अपने इश्क़ की परवाह करने वाला,
सारी रात उसकी यादों में खोए रहने वाला, सुबह उठते ही उसकी तस्वीर निहारने वाला,
हाँ एक लड़का है शायद वो जानती है टाइप मोहब्बत करने वाला,

यूँ तो बहुत कुछ कहना है उसको,
अपना हालात ऐ दिल भी तो शायद बयाँ करना है उसको,
मगर हर बार की तरह इस बार भी वो खामोश रह गया,
उसे खो देने के डर से फिर अपने जज़्बात दिल ऐ गेहरियो में दफन कर गया,
और फिर एक मोहब्बत के खालीपन के साथ लौटने वाला,
हाँ एक लड़का है शायद वो जानती है टाइप मोहब्बत करने वाला,

गुम रहता है वो न जाने किस दिन में,
शाम उसकी इश्क़ की यादों में गुज़रती है,
औऱ एक लड़की की तस्वीर हमेशा,
उसके मोबाइल फ़ोन पे रहती है,
कुछ इस तरह बेइन्तहां मोहब्बत करने वाला,
हाँ एक लड़का है शायद वो जानती है टाइप मोहब्बत करने वाला,

अभी मंजिल नहीं मिली है इश्क़ को उसके,
तभी खुद को उसकी तस्वीर बनाये फिरता है,
सब कहते है पागल उसको,
वो खुद को जोगी कहता फिरता,
इस तरह खुद को अपने इश्क़ में खोने वाला,
हाँ एक लड़का है शायद वो जानती है टाइप मोहब्बत करने वाला,
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